सोमवार, 8 दिसम्बर 2008

तुम मोसम मोसम लगते हो


तुम मोसम मोसम लगते हो

जो पल पल रंग बदलते हो

तं सावन सावन लगते हो

जो बर्षों बाद बरसते हो

तुम सपना सपना लगते हो

जो मुझको कम कम दिखती हो

तुम पल पल मुझसे लड़ते हो

पर फ़िर भी अच्छे लगते हो

बात तो है शर्मीली सी

पर कहने को दिल चाहता है

लो आज तुम्हें यह कह डाला

तुम अपने अपने लगते हो

1 टिप्पणियाँ:

निर्झर'नीर ने कहा…

sundar saral mohak ..
aap apne blog se word varification hata den comment dene mai pareshani hoti hai.