रविवार, १८ अक्तूबर २००९

सूनी रातें

तुम बिन
अधूरी सारी बातें
सूनी रातें
इकहरे सपने
बेगाने लगते अपने
सरसों के खेत
भी लगे जैसे
रेगिस्तान की रेत
दिल जले रत्ती रत्ती
जैसे मोमबत्ती
एक ही दिल था
एक ही सपना
दिल भी टूटा
सपना भी
कोई कहता है
सपने देखना अच्छा होता है
मैंने सपना देखा
टूटे हुए सपनो के साथ जीना आसान है
टूटे हुए सपने के साथ जीना मुश्किल
अचानक टूटे दिल का दर्द
समय के साथ बढ़ता है

मंगलवार, ९ दिसम्बर २००८

शलेष गड़वाली: तुम मोसम मोसम लगते हो

शलेष गड़वाली: तुम मोसम मोसम लगते हो

सोमवार, ८ दिसम्बर २००८

तुम मोसम मोसम लगते हो


तुम मोसम मोसम लगते हो

जो पल पल रंग बदलते हो

तं सावन सावन लगते हो

जो बर्षों बाद बरसते हो

तुम सपना सपना लगते हो

जो मुझको कम कम दिखती हो

तुम पल पल मुझसे लड़ते हो

पर फ़िर भी अच्छे लगते हो

बात तो है शर्मीली सी

पर कहने को दिल चाहता है

लो आज तुम्हें यह कह डाला

तुम अपने अपने लगते हो

गुरुवार, ४ दिसम्बर २००८

बड़ा ही महत्त्व है

सब्जी मै आलू का
जंगल मै भालू का
बिहार मै लालू का
बड़ा ही महत्त्व है !

क्रिकेट मै बालर का
सर्ट मै कालर का
सड़क मै डामर का
बड़ा ही महत्त्व है !

पास मै चाल का
सर मै बाल का
ठण्ड मै साल का
बड़ा ही महत्व है !

परीक्ष मै नंबर जीरो का
फ़िल्म मै हीरो का
लडाई मै बीरो का
बड़ा ही महत्त्व है !

खेल मै ताश का
ससुराल मै सास का
प्रश्न मै काश का
बड़ा ही महत्त्व है !

मंगलवार, १८ नवम्बर २००८

कभी इंटर तो मारो यार

अभी अभी प्यार का पी सी किया चालू
अपने दिल के हार्ड डिस्क मै कितनी फाइल डालूं

अपने चहरे से रुसवाई क एरोर तो हटाओ
ये जाने मन दिल का पासवर्ड तो बताओ

वो तो हम है जो आपकी चाहत दिल मै रखते है
वरना आप जेसे तो कितने सोप्टवायर बाजार मै बिकते है

आप रोज रात को मेरे सपनो मै आते हो
मेरे प्यार को माउस बना के उँगलियों मै नचाते हो

तेरे प्यार का ईमेल मेरे दिलको लुभाता है
पर बीच मै तेरे बाप का वाएरस बीच आजाता है

और कराओगे हमसे कितना इन्तजार
अपने दिल की साईट पर कभी इंटर तो मारो ञार
आपके kahee nakhare दिल पर bang हो gaye
do पी सी milate milate hang हो gaye




रविवार, १६ नवम्बर २००८

मेरी हालात

मुझे तो अपनों ने लूटा गैरों में कहाँ दम था !

मेरी हड्डी थी टूटी वहीँ जहाँ अस्पताल बंद था !

मुझे जिस अम्बुलेंस में लिटाया उसमे पेट्रोल ही कहाँ था !

मुझे तो रिक्क्सा में अस्पताल ले गए क्योंकि किराया कम था !

मुझे तो डॉक्टर ने उठाया नर्सों में कहाँ दम था !

मुझे जिस बेद पर लिटाया उस के निचे बम था !

अजी मुझे तो बम, ने उराया गोलियों में कहाँ दम था !

मुझे तो सरक पर दफनाया क्योंकि कब्रिस्तान में फंक्सन था!!!

मंगलवार, २६ अगस्त २००८

मुक्कदर मै किसी का साथ लिखा न था

मुक्कदर में किसी का सात लिखा न था


थे पल भर के मेहमान सभी


किसी को हमारे साथ रहना गवांरा ना था
कहता था जिन्हें अपना वो गैर हो गए
जो थे कुछ दोस्त वो भी हमगैर बेईमान हो गए
अब जमाने पर भरोसा कैसा बनाएं


बनाया था मुझको इस जहाँ ने ही कुछ ऐसा


अब वो प्यार नजर नही आता


अब वो आशियाँ नजर नही आता


सायद यूँही घुट घुट कर जीने बंदगी कहते है